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लफ्जों की बंदिशे ..............Manju Choudhary
Thursday, June 30, 2011 | Author: Guman singh | Labels: Govtहुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं !
तब ऐ हुक्मरानों ,
ऐ हिंदुस्तान वालो ,
तुम ही बताओ .............
मेरे अल्फ़ाज घुट कर
कही मर गए तो क्या !
तुम्हारी सरकारों का ताज
तो सलामत रहेगा !
हुक्मरानों के महल तो यूही सजते रहेगे !
किसी गरीब का घर उजाड़ गया तो क्या !
कोई देवी बेवा हो गई तो क्या !
तुम्हारे घरो के चिराग तो सलामत रहेगे !
हुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं!
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं !
तब ऐ हुक्मरानों ,
ऐ हिंदुस्तान वालो ,
तुम ही बताओ .............
मेरे अल्फ़ाज घुट कर
कही मर गए तो क्या !
तुम्हारी सरकारों का ताज
तो सलामत रहेगा !
हुक्मरानों के महल तो यूही सजते रहेगे !
किसी गरीब का घर उजाड़ गया तो क्या !
कोई देवी बेवा हो गई तो क्या !
तुम्हारे घरो के चिराग तो सलामत रहेगे !
हुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं!
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केन्द्र सरकार ने रविवार को प्रकाशित अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। विज्ञापन सरकार के प्राकृतिक गैस व पेट्रोलियम मंत्रालय ने जारी किया है। लगभग हर अखबार मे यह विज्ञापन है। सरकार ने इस विज्ञापन के जरिये देश के लोगों को जवाब दिया है कि सरकार के पास रसोई गैस, डीजल व केरोसिन के दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।
सरकार को समझना चाहिए, ईधन की कीमत बढ़ती है, तो विकास भी बाधित होता है। यातायात खर्च बढ़ जाएगा, तो सारी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे, फिर सरकार स्वयं कहेगी कि हमारे पास पैसा नहीं है, योजना या परियोजना महंगी पड़ रही है। वास्तव में सरकार को प्रयास करने चाहिए कि ईधन अनुदान सही हाथों में पहुंचे। केरोसिन, रसोई गैस का दुरूपयोग रूके। साथ ही, सरकार को वित्तीय घाटे के बारे में कम और महंगाई के बारे में ज्यादा सोचना चाहिए।
सरकार को समझना चाहिए
Monday, June 27, 2011 | Author: Guman singh | Labels: महंगाई
केन्द्र सरकार ने रविवार को प्रकाशित अखबारों में एक विज्ञापन प्रकाशित करवाया है। विज्ञापन सरकार के प्राकृतिक गैस व पेट्रोलियम मंत्रालय ने जारी किया है। लगभग हर अखबार मे यह विज्ञापन है। सरकार ने इस विज्ञापन के जरिये देश के लोगों को जवाब दिया है कि सरकार के पास रसोई गैस, डीजल व केरोसिन के दाम बढ़ाने के अलावा कोई रास्ता नहीं था।सरकार को समझना चाहिए, ईधन की कीमत बढ़ती है, तो विकास भी बाधित होता है। यातायात खर्च बढ़ जाएगा, तो सारी चीजों के दाम बढ़ जाएंगे, फिर सरकार स्वयं कहेगी कि हमारे पास पैसा नहीं है, योजना या परियोजना महंगी पड़ रही है। वास्तव में सरकार को प्रयास करने चाहिए कि ईधन अनुदान सही हाथों में पहुंचे। केरोसिन, रसोई गैस का दुरूपयोग रूके। साथ ही, सरकार को वित्तीय घाटे के बारे में कम और महंगाई के बारे में ज्यादा सोचना चाहिए।
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पत्रकारिता सिर्फ पेशा ही नहीं बल्कि एक जुनून है। ऎसा जुनून जिसके आगे डर, खौफ टिक नहीं पाता। दुनिया में ऎसे कई दिलेर पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को अपनाकर और अपनी जान की बाजी लगाकर सच को लोगों के सामने पहुंचाया। मुंबई के पत्रकार जे डे इसी कड़ी के हीरो रहे हैं।मुंबई के पवई में दिन दहाड़े "मिड डे" के इंवेस्टीगेशन एडिटर ज्योतीर्मय डे की हत्या कर दी गई। डे ने हाल ही में मुंबई के ठाणे में डीजल में मिलावट पर सिलसिलेवार रिपोर्ट लिखी थी। उन्हें फोन पर धमकियां मिलना शुरू हो गई थी। लेकिन वे सब खतरों को जानने के बाद भी अपने मिशन में लगे रहे। वे उन लोगों के खिलाफ खड़े हो गए, जिनसे पूरी दुनिया डरती है। उन्होंने अंडरवल्र्ड और पुलिस के संबंधों पर बेबाक होकर खबरें छापी। जे डे ने एक रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा था कि एसीपी महाबोले के तार डी कंपनी से जुड़े हैं।
दरअसल जे डे की हत्या का मामला इतना सहज नहीं है। उनकी हत्या में उन तमाम लोगों को अपनी सुरक्षा और हित दिखाई देते हैं जिनके खिलाफ जे डे लगातार 11 जून तक जूझते रहे। उन्होंने कई मामलों में पुलिस से ज्यादा आपराधिक गिरोह के बारे में खबरें जुटाई। अपराध की घटनाओं की जांच में लगे अधिकारियों को उनके लेखन से मदद मिलती थी। जे डे की हत्या से जुड़े कई खुलासे होने बाकी है। लेकिन उन्होंने जो निडर होकर पत्रकारिता के मिशन में जो जोश भरा है, वह अपना रंग दिखाएगा ही!!
पत्रकारिता एक जुनून :-
| Author: Guman singh | Labels: Journalismपत्रकारिता सिर्फ पेशा ही नहीं बल्कि एक जुनून है। ऎसा जुनून जिसके आगे डर, खौफ टिक नहीं पाता। दुनिया में ऎसे कई दिलेर पत्रकार हुए हैं, जिन्होंने पत्रकारिता को अपनाकर और अपनी जान की बाजी लगाकर सच को लोगों के सामने पहुंचाया। मुंबई के पत्रकार जे डे इसी कड़ी के हीरो रहे हैं।मुंबई के पवई में दिन दहाड़े "मिड डे" के इंवेस्टीगेशन एडिटर ज्योतीर्मय डे की हत्या कर दी गई। डे ने हाल ही में मुंबई के ठाणे में डीजल में मिलावट पर सिलसिलेवार रिपोर्ट लिखी थी। उन्हें फोन पर धमकियां मिलना शुरू हो गई थी। लेकिन वे सब खतरों को जानने के बाद भी अपने मिशन में लगे रहे। वे उन लोगों के खिलाफ खड़े हो गए, जिनसे पूरी दुनिया डरती है। उन्होंने अंडरवल्र्ड और पुलिस के संबंधों पर बेबाक होकर खबरें छापी। जे डे ने एक रिपोर्ट में साफ तौर पर लिखा था कि एसीपी महाबोले के तार डी कंपनी से जुड़े हैं।
दरअसल जे डे की हत्या का मामला इतना सहज नहीं है। उनकी हत्या में उन तमाम लोगों को अपनी सुरक्षा और हित दिखाई देते हैं जिनके खिलाफ जे डे लगातार 11 जून तक जूझते रहे। उन्होंने कई मामलों में पुलिस से ज्यादा आपराधिक गिरोह के बारे में खबरें जुटाई। अपराध की घटनाओं की जांच में लगे अधिकारियों को उनके लेखन से मदद मिलती थी। जे डे की हत्या से जुड़े कई खुलासे होने बाकी है। लेकिन उन्होंने जो निडर होकर पत्रकारिता के मिशन में जो जोश भरा है, वह अपना रंग दिखाएगा ही!!
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