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लफ्जों की बंदिशे ..............Manju Choudhary
Thursday, June 30, 2011 | Author: Guman singh | Labels: Govtहुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं !
तब ऐ हुक्मरानों ,
ऐ हिंदुस्तान वालो ,
तुम ही बताओ .............
मेरे अल्फ़ाज घुट कर
कही मर गए तो क्या !
तुम्हारी सरकारों का ताज
तो सलामत रहेगा !
हुक्मरानों के महल तो यूही सजते रहेगे !
किसी गरीब का घर उजाड़ गया तो क्या !
कोई देवी बेवा हो गई तो क्या !
तुम्हारे घरो के चिराग तो सलामत रहेगे !
हुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं!
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं !
तब ऐ हुक्मरानों ,
ऐ हिंदुस्तान वालो ,
तुम ही बताओ .............
मेरे अल्फ़ाज घुट कर
कही मर गए तो क्या !
तुम्हारी सरकारों का ताज
तो सलामत रहेगा !
हुक्मरानों के महल तो यूही सजते रहेगे !
किसी गरीब का घर उजाड़ गया तो क्या !
कोई देवी बेवा हो गई तो क्या !
तुम्हारे घरो के चिराग तो सलामत रहेगे !
हुकूमत के लफ़्ज मुझे आते नहीं ,
जम्हूरियत के लफ़्ज सरकार जानती नहीं!
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